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वास्तु नियमों का सारांश


26 Sep 10

वास्तु नियमों का सारांश

पूर्व व उत्तर में अधिक खुली जगह।

पश्चिम व दक्षिण में कम खुली जगह।

पूर्व व उत्तर में ढाल।

ईशान में जल तत्त्व।

अग्नि कोण में रसोई घर व अग्नि तत्त्व।

पश्चिम व दक्षिण में रहने व सोने के कमरे।

नैऋत्य में मुख्य व्यक्ति का निवास।

कमरे से जुड़े शौचालय-अग्नि व वायव्य में बनाये जा सकते हैं परन्तु इससे पूरे कमरे में कोई अमंगलकारी घटाव या बढ़ाव नहीं होना चाहिए।

सीढ़ी-अग्नि या वायव्य में।

ईशान से मुख्य प्रवेश।

अन्य द्वार-मंगलकारी स्थल में।

छत का ढाल पूर्व व उत्तर में।

पूरे भूखण्ड में वजन बटा हुआ परन्तु पश्चिम एवं दक्षिण का हिस्सा पूर्व व उत्तर के हिस्से से भारी व ऊँचा, कमरे में संयुक्त जुड़ा हुआ लेट्रिन बाथरूम होना हितकर नहीं है।

 

  
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