Sant Shri
  Asharamji Ashram

     Official Website
 

Register

 

Login

Follow Us At      
40+ Years, Over 425 Ashrams, more than 1400 Samitis and 17000+ Balsanskars, 50+ Gurukuls. Millions of Sadhaks and Followers.

Lok Kalyan Setu in Ordiya

Lokkalyan Article View
परमात्मा हैं वृक्ष और संत हैं मधुर फल

परमात्मा  हैं वृक्ष और संत हैं मधुर फल        -पूज्य बापू जी  

बोले :” भगवान भक्तो पर कृपा करते हैं | ‘ करते होंगे लेकिन महात्मा नही  तो कोई भक्त भी नहीं होता और कोई “भगवान” भी नहीं बोल  सकता  था | उन्हें पता भी नहीं होता |

भगवान भक्तो पर कृपा करते है लेकिन महात्मा ना होते तो भगवान के विषय में समझाता ही कौन? हमें भक्त कौन बनाता ? हमें साधन भजन के रास्ते पर लगाता ही कौन ?

भगवान कृपा करते हैं तो किस पर कृपा करते हैं ?अपने भक्त पर | भक्त कौन बनाता है ? महात्मा तो | महात्मा ने भक्त बनाया तब भगवान ने कृपा की |

महात्मा प्रत्यक्ष हैं और परमात्मा परोक्ष हैं या तो अपराध हैं |  सृष्टिकर्ता के रूप में हैंया तो अव्यक्तरूप में हैं | तो महात्मा ने भक्त बनाया तब भगवान ने कृपा की |

महात्मा प्रत्यक्ष हैं और परमात्मा परोक्ष हैं या तो अपरोक्ष हैं |सृष्टिकर्ता के रूप में हैं या तो अव्यक्तरूप  में हैं |तो सृष्टि की रचना की उस समय भी हमने उनको देखा नहीं और अभी  कहा हैं वह भी हम ठीक से नहीं जानते ,नहीं देख सकते और जो अयव्क्तरूप में हैं वह भी माना है |
जाना नहीं लेकिन महात्मा जी को जाना है,माना भी है, उसको सुना भी है और उनकी ज्ञान की मशाल लेकर कुछ जीने का ढंग भी तो जाना है |इसलिए  उनसे ज्यादा लाभ होता है |

            आम्रवृक्ष को आप चाटें, चबायें तो कुछ नहीं लेकिन आम्रवृक्ष में जो आम है उसको महाराज! देखते ही रसीलापन आ जाता है और उसके रस को जरा सा होठं पर रखते ही तृप्ति होने लगती है | ऐसे ही महात्मा लोग आम हैं और परमात्मा आम का वृक्ष हैं |

     रंग अवधूत महाराज जी से पूछा गया कि “महाराज जी! अब आप ज्ञातज्ञेय हैं, ज्ञानी हैं तो अभी आपको किस बात की रूचि हैं ?"

         बोले : “ दो बाते, एक किसी महात्मा के जीवन –चरित्रवाली पुस्तक हो तो अभी भी पढ़ने की रूचि रहती है और कोई  महात्मा आये हों  तो अभी भी पड़ने की रूचि रहती है और कोई महात्मा आये हों तो उनको भोजन खिलाने की भी  रूचि  रहती है |

इसलिए “श्रीमद भागवत” के  ग्यारवे  स्कंध में श्रीकृष्ण ने कहा कि है’’ महात्मा लोग तो मेरे भी पूजनीय हैं और में उनके पीछे पीछे घूमता हूँ कि उनकी पद –रेणु (चरणरज )मुछे मिल जाय और भागवत के महात्म्य में भी आयी है महात्माओं कि महिमा | श्रीकृष्ण की  महिमा गाता हुआ भागवत महात्मा कि  महिमा गाते हुए नही थकता | भगवान की महिमा गाते हुए शास्त्र महात्माओं की  महिमा गाये बिना रह नहीं सकते | “रामायण” श्रीरामचन्द्रजी की गाथा हैं फिर भी उसमे संत महिमा हैं | अब रामायण राम जी की भक्ति, भगवान की कृपा, महिमा आदि का तो वर्णन कर रहा हैं और फिर कह रहा है :

"संत समागम के समान दूसरा कोई लाभ नही|" यह रामायण कह रहा है | ऐसा कोई
सत्शास्त्र नहीं जिसमें सच्चे ब्रह्मवेताओं की प्रंशसा न हों |



View Details: 5120
print
rating
  Comments

  2/13/2014 4:24:49 PM
kishanrao B. kulkarni 


New Comment 
hariom Bapuji
Apka yeha bath sach hai,
  1/7/2014 12:55:40 AM
ANIL KUMAR PATEL 


JAI HIND 
SADGURU....KI...MAHIMA....ANANT.....HAI...................HARI OM.............
  9/21/2013 4:58:24 PM
gagan bihari jena 


New Comment 
New Comment

Your Name
Email
Website
Title
Comment
CAPTCHA image
Enter the code
Subsribe for LKS
Minimize

Monthly Lok Kalyan Setu Article List
Skip Navigation Links.
Copyright © Shri Yoga Vedanta Ashram. All rights reserved. The Official website of Param Pujya Bapuji