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24th Jan 2014

 


संत आशारामजी बापू को बार-बार बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है । अब राहुल सचान नाम के एक व्यक्ति ने यह आरोप लगाया है कि संत आशारामजी आश्रम द्वारा ८ लोगों को माइंड वॉश करके आत्मदाह के लिए तैयार किया गया है । ऐसे आरोप लगाकर उसने संत आशारामजी आश्रम के खिलाफ अर्जी भी दर्ज कराई है । परन्तु सच्चाई क्या है यह तब सामने आया जब आश्रम ने प्रेस नोट रिलीज करके इस बात का खंडन किया ।
संत श्री आशारामजी बापू को जब भी जमानत मिलने वाली होती है, उसके पहले ही कुछ लोगों के द्वारा झूठे आरोप लगाकर और नई-नई कहानियाँ बनाकर बदनाम करने का प्रयास किया जाता है । उसी में यह राहुल सचान नाम का व्यक्ति है । कहीं पर तो लेप-टॉप बाबा के नाम से जाना जाता है और कहीं आर.डी. के नाम से जाना जाता है । अनेकों नामों से जगह-जगह घूमने वाला यह व्यक्ति महिलाओं से अश्लील इ-मेल भेजने के आरोप में कई बार जेल भी जा चुका है । इसने कम्पनी का साईट भी हेक कर लिया था और महिलाओं को गंदे मेल भेजता था । इसके साथ-साथ कई महिलाओं के साथ इसने फ्रॉड करने की कोशिश भी करी । इसी कारण यह कई बार जेल की सजा काट चूका है ।
संत श्री आशारामजी बापू को बदनाम करने के लिए ऐसे कई लोगों द्वारा पहल की जा चुकी है । मुंबई पुलिस में इसके खिलाफ एफ़.आई.आर. दर्ज करवाई गयी थी । मुंबई पुलिस ने इस पर सेक्शन 345, IPS की धारा 509, ITX 2000 की धारा 67 के तहत केस दर्ज किया था । ये न्यायिक हिरासत से बचने के लिए मुंबई पुलिस से भागकर पाकिस्तान से सटे राजस्थान के एक गाँव में जाकर छुप गया था । इसने वहाँ अपना नाम बदलकर लेप-टॉप बाबा के नाम से रहना शुरू किया । इसने कई बार ऐसे कई कार्य किये हैं जिससे पुलिस को इस पर शक भी रहा है ।
ऐसे व्यक्ति जो की भोलानन्द कहें या फिर राहुल सचान, संत आशारामजी बापू को और उनके आश्रमों को समय-समय पर बदनाम करने का प्रयास करते रहें हैं ।
वहीं पर दूसरी और आज १५० दिन पुरे हो चुके हैं फिर भी जंतर-मंतर पर आज भी संत श्री आशारामजी बापू की रिहाई को लेकर माँग चालू है । हज़ारों की संख्या में वहाँ पर साधक एकत्रित हैं और सभी के मन में एक ही भाव है कि संत आशारामजी बापू को जमानत तक क्यों नहीं दी जा रही है ?
वहीं दूसरी ओर पोस्को की धारा लगने के बावजूद दीपक चौरसिया की गिरफ्तारी पर २४ फरवरी तक के लिए रोक लगाई गयी है । दीपक चौरसिया ने एक संधिग्ध सी.डी. समाज के सामने रखी थी जिसमें संत आशारामजी बापू एक छोटी सी बच्ची के कंधे पर हाथ रखकर आशीर्वाद दे रहे थे । पर उसको संत आशारामजी बापू के साथ गलत संबंध बता कर इस तरीके से उछाला गया जिससे कि उसके माँ-बाप, उनका परिवार काफी आहत हुआ है । इसीलिए कुछ चैनलों के मालिक और एडिटरों के खिलाफ पोस्को की धारा लगाई गई है और उनपर जीरो ऍफ़.आई.आर. दर्ज हुई है ।
आचार्य भोलानन्द नाम से चैनलों पर आकर संत श्री आशारामजी बापू को बदनाम करने वाला शख्स अभी पुलिस की गिरफ्त में है । इसने जम्मू में बच्चे गड़े होने का आरोप लगाया था । इसके साथ-साथ संत श्री आशारामजी आश्रम पर कई आरोप इसने लगाये थे । इसने जमानत की अर्जी लगाई थी जो ख़ारिज कर दी गयी है । इसने कई खुलासे किये जिसमें कई चैनलों के मालिक और एडिटरों के नाम भी शामिल हैं । कई ऐसे खुलासे किये हैं जिससे इनकी पूरी गेंग का पता चल सकता है । कई बड़ी-बड़ी राजनैतिक पार्टियाँ तथा ऐसे कई लोग शामिल हैं जो संत आशारामजी बापू को फ़साने का, बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं ।
तफ्तीश होती है जेल में और सारी खबरें खुलकर बाहर आ जातीं हैं । कोई बात तो उठने से पहले ही मीडिया चैनलों द्वारा दिखा दी जाती है । ये लोग बार-बार आकर संत आशारामजी बापू को बदनाम करने का प्रयास तो करते हैं लेकिन ठोस सबूत प्रमाणित नहीं कर पाते । तो क्या यह बड़ा सवाल नहीं है कि आज चाहे भोलानन्द हो या राहुल सचान, राजू चांडक हो या अमृत प्रजापति या अजय भिमानी परन्तु इन लोगों के द्वारा लगाये आरोप आज तक सिद्ध नहीं हो पाएं हैं । आज जनता के सामने यह सवाल है कि संत आशारामजी बापू जैसे संतों को बदनाम करके क्यों फसाया जा रहा है ?

संत प्रीतमदासजी महाराज
बापूजी पर जो आरोप लगाये जा रहे हैं ये पूर्ण निराधार है, इनमें ना तो कोई सार है नाही कोई वास्तविकता । हकीकत तो यह है कि जितने भी अभी तक आरोप लगाये गये हैं वे अभी तक प्रमाणित नहीं हुए हैं । बापूजी तो प्रतिष्ठित और बहुत ही जाने-माने संत हैं । उन्होंने तो भारत को नई दिशा, नई पहचान, स्वाभिमान, बहुत कुछ दिया है । मैंने बापूजी को कई बार सुना है और नजदीक से देखा है । क्यों कि जब भारत में बाढ़ आयी थी, हज़ारों लोग बेघर हो चुके थे, जिनका कोई आश्रय नहीं था, बापूजी ने उनके लिए मकान बनवाये, कपड़े, बर्तन आदि व्यवस्था वहाँ की । जहाँ प्रशासन नहीं पहुँचा वहाँ बापूजी द्वारा सेवा करवाई गयी थी । तो मीडिया उनकी सेवा को, उनके कार्यों को, जहाँ उन्होंने लोगों को दानव से मानव बना दिया ये मिडिया ने क्यों नहीं दिखाया ? जब हज़ारों गरीबों को बापूजी ने आश्रय दिया ये मिडिया ने नहीं दिखाया । रही बात आरोपों की तो आरोप तो कोई भी लगा सकता है । हम इन आरोपों को नहीं मानते हैं और पैसे देकर किसी से भी कुछ भी बुलवाया जा सकता है ।
अधिकतर हिन्दू संतों, भारतीय संस्कृति को बदनाम करने के लिए हर संत को साजिश का शिकार बनाया जा रहा है । बापूजी के अलावा कई ऐसे संत हैं जिनके खिलाफ ऐसी साजिशें की गई थी और अधिकतर सब झूठे आरोप पाये गये । संत ही समाज को रास्ता, दिशा दिखाते हैं । अगर संत नहीं रहेंगें, तो भारत भी नहीं रहेगा । अगर भारत को बचाना है तो संतों के मार्ग दर्शन में मीडिया को, जनता को, हम को और सबको चलना चाहिए और संत ही वह शक्ति है जिसके आगे भगवान ने भी साक्षात् नमन किया है । हमें गर्व है की बापूजी जैसे संत हमारे देश में हैं ।

स्वामी प्रशान्तानन्दजी महाराज
बापू आशारामजी जब अपने साधना काल में साधना करते थे तब वे अकेले, विरक्त थे । लेकिन उनको लगा कि जगत कल्याण के लिए उतरें । जब भारत निर्माण के लिए उतरें तो कारवाँ बढ़ता गया और ५, ६ करोड़ लोग जुड़ गये । उनको दिशा, ज्ञान, सत्य का पद दिया । उनको पूरे विश्व का निर्माण करना है । निर्माण करने वाले उस महापुरुष को आज हम उस द्वार बंद जगह नहीं देखना चाहते हैं । हम चाहते हैं कि बापू जल्दी से जल्दी बाहर आ जाएँ । पाप और पुण्य क्या है इसका दिशा निर्देश समाज करता है । धर्म और अधर्म क्या है इसके विषय में शास्त्र और वेद सोचता है । अपराध क्या है और क्या नहीं है इसके विषय में सविधान सोचता है । किन्तु हमारे संविधान में कोई धर्म मंच नहीं है । जिसकी वजह से हमें प्रताड़ित होना पड़ता है । पूरे विश्व का निर्माण करने वाले को यदि जेल में बंद किया जाये तो अन्य राष्ट्र वाले क्या सोचते होंगें ? इतना सोचो २५ साल में ५,६ करोड़ लोग किसके साथ जुड़ते हैं ?  किसी पार्टी के साथ नहीं होता उनको कितने ही पापड़ बेलने पड़ते हैं ।

हर्षानंदजी 
भारत के धर्माचार्यों से विनम्र प्रार्थना करता हूँ कि वे भारतीय संविधान को पढ़ें । क्योंकि धर्म और राजनीति ये एक-दूसरे के पूरक हैं । राजनीती में धर्म रहेगा तो वह शुचिता को प्राप्त होगी । और धर्म में राजनीती आएगी तो समाज विकृति की ओर जायेगा और जा रहा है । सारी दुनिया खारे पानी को शुद्ध करने के लिए अरबों रुपय खर्च कर रही है और हम सब मिलकर जल की पवित्र धारा को गंदे नालों में बदलते जा रहे हैं । इसका प्रभाव क्या हो रहा है  ?

श्री महेश वोड़ा, वरिष्ठ अधिवक्ता
आरोप तो लड़की ने लगाये हैं, लेकिन जिस प्रकार की एफ.आय.आर. तथा पुलिस का चलान पेश हुआ है, उसको पूरा पढ़ने के बाद लगता है कि इसमें कोई ज्यादा सत्यता नहीं है । बहुत अजीब सा लगता है कि 15 अगस्त की वह घटना है और 16 अगस्त को वह उ.प्र. चली गयी, फिर दिल्ली में गयी - कमला नगर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखवाई । उससे यह साफ था कि यहाँ इस केस में दिल्ली का कोई संबंध बनता नही है । उसके बावजूद भी उस रिपोर्ट को रखा गया, उसका (लड़की का) मेडिकल कराया गया, 164 (83) के बयान किये गये । यह सब करने के बाद उसको जोधपुर भेजा गया । तो दिल्ली में एफ.आय.आर. तथा 164 के बयान के बाद यह जोधपुर में लड़की को भेजना अपने आप में एक बहुत बड़ा कारण बन जाता है । यह पहली केस मैंने देखी है, जिसमें कि एफ.आय.आर. सही रुप से दर्ज होने के पहले ही 164 का बयान लिया गया है । फिर इसे न्याय्य ठहराने के लिए बहुत सारे बयान उतार लिये गये । अचंबा इस बात का है कि पूरी चार्जशीट के अंदर लड़की का बयान, लड़की के माता-पिता का बयान ये तीन बयान मुख्य रुप से खिलाफ हैं । इसके बाद उन्होंने ऐसे बहुत सारे बयान उतारे जिनका इस केस से कोई ज्यादा ताल्लुक नहीं । इन सारे बयानों को इस केस को गंभीर स्वरुप दिलाने के लिए witness के तौर पर रखा गया । इसमें पुलिस द्वारा यह दिखाने की कोशिश की गई कि आशारामजी बापू अभी नहीं बहुत पहले से ही ऐसे गंभीर अपराधों में फँसे हैं । पूरे बयानों को देखते हुए साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं इसके अंदर ना इन्साफी हो रही है । अभी तक की केस की कार्यवाही को देखके मैं यह कह सकता हूँ कि यहाँ फेयर इन्वेस्टिगेशन (निष्पक्ष जाँच) नहीं हुआ है । राजस्थान पुलिस के पास यह केस ही तब आया जब लड़की के बयान एक मैजिस्ट्रेट (न्यायाधीश) के समक्ष हो चुके थे, 164 (83) के तहत । जब राजस्थान में केस आया तो पुलिस 164 (83) बयान के आस-पास ही घुमते रहे और उस बयान की पुष्टि का प्रयास करती रही । जब कि सही तरिका यह था कि एक नये सिरे से इन्वेस्टिगेशन करके उस बायन की सत्यता जाँच लेना । चौकाने वाली बात यह है कि सारा इन्वेस्टिगेशन करने के बाद भी पुलिस ने बापूजी के खिलाफ बलात्कार का आरोप प्रस्तुत किया, जब कि पेनेट्रेशन था ही नहीं (बलात्कार हुआ ही नहीं) । जब यह हुआ ही नहीं तो POCSO की 376 के तहत लगायी हुई धारायें भी गलत साबित होती हैं । और एक सेक्स ट्रैफिकींग की 370 की धारा भी लगायी गयी है । इस मामले में अगर सारे सबूत उठाके देखते हैं तो ऐसा कुछ भी (उसके आधार में) सामने नहीं आता ।

अनुभव - डॉ. महेश पटेल
हम सूरत से महसाणा में हमारी फियाट गाड़ी से जा रहे थे । हम 30 अप्रैल को सूरत से निकले थे । गाड़ी के पीछे बापूजी का फोटो था । बीच में नाश्ता-पानी के लिए हाय वे पर हमने गाड़ी खड़ी की । जैसे हम नीचे उतरने ही वाले थे अचानक से एक लक्झरी बस ने हमारी गाड़ी को पीछे से ठोक दिया । तो हमारी गाड़ी आगे होकर आगे के ट्रक पर टकराई । और हम बीच में सैंडविच जैसे हो गये । हम को तो कुछ होश ही नहीं था । गाडी का स्टिअरिंग मेरे छाती पर आया था । पीछे बैठे हुए कुटुम्बी भी मेरी आगे की सीट पर आ गये थे । गाडी की ऐसी खराब स्थिति थी, कि देखने वाले लोग सोचे कि गाडी में जितने भी लोग बैठे होगे, उनमें से कोई बचा नहीं होगा । लेकिन हमारे में से किसी को भी जरासी खरोच तक नहीं आयी । हमारी गाडी पूरी टुट गयी थी, लेकिन बापू का फोटो लगा हुआ गाडी का जितना भी हिस्सा था, उसको बिलकुल नुकसान नहीं पहुँचा था, यह बड़े आश्चर्य की बात है । तो इसके बाद हमारी बापूजी पर श्रद्धा दिन दुगनी रात चौगुनी बढ़ती ही चली गयी ।



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