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आज भी नहीं हो पायी संत आशारामजी बापू के भानजे की अंत्येष्टि

 

प्रेस-विज्ञप्ति

                                                                                                                                                                                दिनांक : 24-03-2015

आज भी नहीं हो पायी संत आशारामजी बापू के भानजे की अंत्येष्टि
शंकर भाई की अंतिम इच्छा के लिए हो रहा है बापू का इंतजार

 


 

      संत आशारामजी बापू के भानजे श्री शंकर भाई की अंत्येष्टि के लिए पिछले 6 दिनों से बापू का इंतजार हो रहा है । 20 मार्च को बापू की अंतरिम जमानत याचिका गांधीनगर सेशन कोर्ट में लगाई गई थी । कोर्ट ने 3 दिन बाद की तारीख दी । फिर एक दिन बाद की तारीख दी गयी । 24 मार्च को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है । गौरतलब है कि बापू के भानजे शंकर भाई का अहमदाबाद में 19 मार्च की रात्रि में स्वर्गवास हो गया था । पिछले 6 दिनों से उनकी मृतदेह बापू के हाथों अपना दाह-संस्कार कराने की अंतिम इच्छा के लिए बापू का इंतजार कर रही है ।

उनके स्वास्थ्य की देखरेख करनेवाले फिजियोथेरेपिस्ट नारायणचंद्र त्रिपाठी ने अपने बयान में कहा है - ‘‘वे बहुत व्यथित रहते थे और हमेशा यही चिल्ला-चिल्ला के बोलते थे कि मेरे बापू निर्दोष हैं । इस पीड़ा से उनको बार-बार हृदयगति रुक जाने की तकलीफ होती थी, हार्ट अटैक आता था । उनको 5-6 बार अटैक आ चुका था । वे हमेशा यही बोलते थे कि अगर मेरा शरीर शांत हो जाये तो बापू के हाथों ही मेरा अंतिम संस्कार हो । मेरी अंतिम इच्छा यही है ।’’

लम्बे समय से एवं शंकर भाई की अंतिम घड़ियों में भी उनके साथ रहे मेजर अशोक चौधरी ने बताया - ‘‘बापू के भानजे श्री शंकर भाई पागारानी को बापूजी स्नेह से ‘शहंशाह आलम’ बोलते थे । बापूजी को जब से जेल में बंद किया गया है, तब से वे बहुत व्यथित होते थे कि मेरे बापूजी निर्दोष हैं, निष्कलंक हैं । रात को भी वे बहुत व्यथित होते थे और इस दुःख के कारण उनको हार्टअटैक आना शुरू हो गया । मुझे उनके साथ रहने का मौका मिला । वे रात को भी चिल्लाते थे - मेरे बापूजी निर्दोष हैं, निर्दोष हैं और ऐसा करके बेहोश हो जाते थे और अटैक आ जाता था । वे कहते थे कि मैं बापू के बिना रह नहीं पाऊँगा । बापूजी ही मेरे सब कुछ हैं और बापूजी के सिवा मेरा इस दुनिया में कोई है ही नहीं । मेरा जीवित रहना बड़ा मुश्किल है । अगर मेरा शरीर छूट जाता है तो मेरी अंतिम इच्छा यही है कि मेरे बापूजी के द्वारा मेरा दाह संस्कार हो, उसीमें मेरा कल्याण है । शास्त्रों में भी लिखा गया है और न्यायालय भी मानता है कि आदमी की जो अंतिम इच्छा होती है उसकी पूर्ति होनी चाहिए । हमारा प्रशासन से, न्यायालय से अनुरोध है कि बापू को शंकर भाई के अंतिम संस्कार के लिए रिहा किया जाये ।’’
आश्रम सूत्रों के अनुसार, पिछले 35 साल से शंकर भाई आश्रम में रहते थे । वे अविवाहित थे और उनका बापूजी के सिवाय कोई और नहीं था | अपने जीवन में शंकर भाई ने बापूजी को अपना मामा नहीं बल्कि ईश्वर से भी ऊँचा गुरु स्थान दिया हुआ था | वे बार-बार यह कहते थे कि बापूजी को निर्दोष होते हुए भी फँसाया गया है तथा केस की सच्चाई, उनकी उम्र, उनके सतत पिछले 50 वर्षों से किये गये समाज-उत्थान के कार्य आदि सभीको दरकिनार करते हुए उनके साथ असमानता का व्यवहार करके उन्हें परेशान किया जा रहा है | इसी तरह के विचारों और निर्दोष बापूजी को मुक्त कराने के सभी असफल प्रयासों से निराश होकर उन्होंने अपने खान-पान की चिंता त्याग दी जिससे उनकी शारीरिक हालत बिगड़ती गयी ।
शंकरभाई की अंतिम इच्छा एवं उनकी तीव्र श्रद्धा-भावना को देखते हुए अहमदाबाद एवं अन्य आश्रमों के आश्रमवासी भाई-बहनें तथा पूज्य बापूजी के देशभर में फैले असंख्य साधक पिछले चार दिनों से अन्न-त्याग कर उपवास कर रहे हैं । अनेकों समाजसेवी संगठनों जैसे - श्री योग वेदांत सेवा समितियाँ, सनातन संस्था, हिंदू जनजागृति समिति, हिंदू युनाइटेड फ्रंट, धर्म रक्षा मंच, भारतीय युवा शक्ति, युवा हितकारिणी संघ, महिला उत्थान मंडल, युवा सेवा संघ, अखिल भारतीय नारी रक्षा मंच, सार्थक महिला संगठन, नारी उत्थान फाउंडेशन, शक्ति सेना, भारतीय नारी शक्ति आदि एवं पू्ज्य बापूजी के करोड़ों साधकों ने शासन-प्रशासन एवं मा. न्यायालय के समक्ष यह माँग रखी है कि मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए पूज्य बापूजी को अंतरिम जमानत अवश्य दी जाय । विश्व हिन्दू परिषद के मुख्य संरक्षक एवं पूर्व अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल ने भी बापू को जमानत दिये जाने की माँग की है ।
तरुण तेजपाल को माँ की अन्त्येष्टि के लिए 3 सप्ताह की अंतरिम जमानत दी गयी थी । लालू प्रसाद यादव एवं जयललिता को मुक्त कर दिया गया है, संजय दत्त को अनेक बार पैरोल दे दी गयी है । तो बापू जैसे समाजसेवी संत, जिनके खिलाफ कोई भी ठोस सबूत न होते हुए भी पिछले 19 महीनों से जेल की सजा भुगत रहे हैं एवं प्रताड़ना झेल रहे हैं, उन्हें इतने करीबी रिश्ते और ऐसे विशेष जीवन-मरण के अवसर में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत अवश्य दी जाय ऐसी मा. न्यायालय से प्रार्थना की गयी है ।

 


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