Sant Shri
  Asharamji Ashram

     Official Website
 

Register

 

Login

Follow Us At      
40+ Years, Over 425 Ashrams, more than 1400 Samitis and 17000+ Balsanskars, 50+ Gurukuls. Millions of Sadhaks and Followers.

Parva Mangalya

11व़ी सदी के शुरुवात में, सिंध प्रदेश जो 1947 से पाकिस्तान का हिस्सा है, के थट्टा जिले का उन्मादी राजा मिर्ख शाह ने हिन्दुओं को इस्लाम धर्म अपनाने की आज्ञा दे दी थी । हिन्दुओं ने सिन्धु नदी के किनारे खड़े होकर भगवन विष्णु के अवतार जल देवता वरुण से अपनी सहायता के लिए प्रार्थना की ।

सिन्धु नदी से वरुण देव प्रकट होकर सभी को आशीर्वाद दिया और सांत्वना दिया की उनके उत्पीडन को नष्ट करने के लिए वे नस्सरपुर के रतन लाल के घर  जन्म लेंगे ।  1007 में रतन लाल और देवकी देवी के घर उदेरो लाल का जन्म हुआ । उसके बाद से कई चमत्कार हुए।
.
मिर्ख शाह अपने मंत्री युसूफ के साथ अमर लाल उदेरो लाल से हार स्वीकार करते हुए माफी मांगी । उन्होंने एकता, प्यार और सामन्जस्य का पाठ पढाया दोनों समुदायों को ।  उस समय से हिन्दू वरुण देव के अवतार को "संत झूले लाल" के रूप मानते हैं और मुस्लिम "जिन्द पीर" अर्थात हयात संत के रूप मे।

जब बच्चे थे कई बाल लीलाएं की और थोड़े ही दिनों में उनके चमत्कार और दैवी शक्तिओं की खबर पूरे सिंध प्रदेश में फ़ैल गई ।

 उस समय का राजा मिर्ख शाह अपने मन्त्रियों  और दूतों को भेज कर उस बच्चे के चमत्कारों की परीक्षा करवाई । कुछ ही दिनों में उन्हें विश्वाश हो गया की इस बच्चे(उदेरो लाल)में चमत्कारी शक्ति है । फिर भी अहंकारी मिर्ख ने आज्ञा दी की उदेरोलाल को उसके पास लाया जय जिससे वो उन्हें अपने गिरफ्त में करके मार डाले ।

मिर्ख और उदेरोलाल का मिलन और भी कई चमत्कारों को प्रदर्शित करने वाला रहा । राजा के सैनिकों ने उन पर आक्रमण कर दिया, उदेरोलाल ने अकेले होते हुए भी सभी को मात कर दिया । राजा उनके पैरो पर गिर पड़ा और प्रतिज्ञा की कि वो अब हिन्दुओं को परेशान नहीं करेगा । इस तरह से उदेरोलाल सत्य, अभय और दैवी आशीर्वादों के चिन्ह हैं ।

उन्होंने सिंध के चारो तरफ भ्रमण किया और लोगों को साहस और वीरता का सन्देश दिया । उदेरोलाल ज्यादातर पल्ला मछली पर भ्रमण करते थे इसलिए उन्हें मछली पर बैठे हुए चित्रित किया जाता है । 1020 में उन्होंने अपने पार्थिव शरीर का त्याग उसी सिन्धु नदी में कर दिया जहा से वे प्रकट हुए थे ।

चेटीचंड उनके जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है । चैत्र महीने के अमावस्या के दिन यह मनाया जाता है । हिन्दू चेटीचंड को नए साल के रूप में मनाते हैं साथ ही साईं उदेरोलाल या झूलेलाल या केवल लाल साईं के जन्म दिन के रूप में भी मनाते हैं । इस दिन उनका जन्म 1007 AD में सिंध के नस्सरपुर के साधारण परिवार में मुस्लिम शासक द्वारा उत्पीडित एवं धर्मान्तरण के लिए मजबूर हिन्दुओं के प्रार्थना करने पर हुआ था ।

जब वे बच्चे थे उस समय भी उन्होंने बहुत से चमत्कार किये । उस समय के शासक तक ये बात पहुँची तो वो  धर्मांधता , जातिवाद को  छोड कर उनका शिष्य बन गया । पारम्परिक व्यापारी सिन्धी हिन्दू जो उस समय नाव से विदेशों में यात्रा करते थे लाल साईं जी को जल देवता के रूप में पूजन करते हैं । झूलेलाल जी की सवारी (जैसे विष्णु भगवान का गरुड़ है) सिन्धी पालो है जो की हमारे सिंध के पूर्वजो का प्रिय व्यंजन था । पालो मछली सिंध नदी के मीठे जल में पाई जाने वाली मछली है।
 
पारम्परिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में संध्या के समय होनेवाला बहरानो - एक तरह का लोक नृत्य ( घुंघरुओं के साथ ) जिसमे दर्शक भी साथ हो लेते हैं, झूलेलाल के गीत गाते हैं ।  प्रार्थना पूजन में अखो भी होता है जिसका अर्थ है दिए जलाना और उनको नदी या पानी में तैरा देना । प्रसाद में ज्वार से बना नान और पुदीने की चटनी भी होती है । इसके बाद शाकाहारी भोज का कार्यक्रम  होता है।

साईं उदेरोलाल को झूले लाल भी कहते थे क्योंकि बचपन में झूले में रह कर उन्होंने कई चमत्कार किये थे ।


Health Tips
  • नीम का पेड़ चैत्र में नई कोमल पत्तियों से लदा रहता है | चेटीचंड के दिन १५-२० नीम की कोमल पत्तियों  को २-३ कालीमिर्च के साथ अच्छी तरह से चबा के खाये |
    ये प्रयोग त्वचा की बिमारियों से, खून की गड़बड़ी से और आम बुखार से पुरे साल सुरक्षा करता है | 

 


Book

 

  Jhuleelal AvatarLeela

 

    Read  E- Book


Audios
Live Tabs - Standard Edition - License Revoked!
Contact Us


Copyright © Shri Yoga Vedanta Ashram. All rights reserved. The Official website of Param Pujya Bapuji